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مقالات انديشه اي

नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार-१८

अली अलैहिस्सलाम के दृष्टिकोण से दुनिया या संसार

इस्लामी दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो संसार का सीधा संबन्ध परलोक से है और यह उससे बिल्कुल अलग नहीं है।


अंतिम अद्यतन (गुरुवार, 13 नवम्बर 2014 10:23)

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इस्लामी सम्प्रदायों के बीच आपसी एकता मज़बूत करने के रास्ते 2

अगर हज़रत अली अलैहिस सलाम के सर में वहदत और हिफ़्ज़े इस्लाम का सौदा न होता तो वो मौक़े से फ़ाएदा उठा सकते थे।



अंतिम अद्यतन (सोमवार, 10 नवम्बर 2014 10:36)

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अज़ादारी-3

क्या आप महान व सर्वसमर्थ ईश्वर से प्रेम करने वाले व्यक्तियों को पहचानते हैं? ईश्वर से प्रेम करने वालों का हृदय उसके प्रेम में डूबा होता है।



अंतिम अद्यतन (शुक्रवार, 07 नवम्बर 2014 16:38)

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ईश्वरीय वाणी-८

कुरआने मजीद के पांचवें सूरे का नाम माएदा है। माएदा का अर्थ दस्तरखान होता है और चूंकि इस सूरे में उस घटना का वर्णन है जिसमें हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने ईश्वरीय भोजन और दस्तरखान के लिए प्रार्थना की थी इस लिए इस का नाम माएदा अर्थात दस्तरखान पड़ गया।

 


अंतिम अद्यतन (गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014 11:07)

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अज़ादारी

मोहर्रम का दुःखद महीना फिर आ गया। लोग मोहर्रम मनाने की तैयारी करने लगे हैं। मोहर्रम आने पर बहुत से लोग यह सोचने लगते हैं कि आखिर क्या वजह है कि १४ शताब्दियां बीत जाने के बावजूद आज भी लोग इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का शोक मनाते हैं।



अंतिम अद्यतन (रविवार, 26 अक्टूबर 2014 22:07)

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