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ईश्वरीय वाणी-८

कुरआने मजीद के पांचवें सूरे का नाम माएदा है। माएदा का अर्थ दस्तरखान होता है और चूंकि इस सूरे में उस घटना का वर्णन है जिसमें हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने ईश्वरीय भोजन और दस्तरखान के लिए प्रार्थना की थी इस लिए इस का नाम माएदा अर्थात दस्तरखान पड़ गया।

 


अंतिम अद्यतन (गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014 11:07)

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अज़ादारी

मोहर्रम का दुःखद महीना फिर आ गया। लोग मोहर्रम मनाने की तैयारी करने लगे हैं। मोहर्रम आने पर बहुत से लोग यह सोचने लगते हैं कि आखिर क्या वजह है कि १४ शताब्दियां बीत जाने के बावजूद आज भी लोग इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का शोक मनाते हैं।



अंतिम अद्यतन (रविवार, 26 अक्टूबर 2014 22:07)

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नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार १७

हज़रत अली अलैहिस्सलाम की दृष्टि में सरकार का लक्ष्य/ सरकार और सरकारी अधिकारियों के हितों की रक्षा करना नहीं है बल्कि मानवीय मूल्यों एवं नैतिक गुणों के आधार पर आदर्श समाज का गठन है।

 

अंतिम अद्यतन (शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2014 10:09)

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ख़ुशी और प्रसन्नता के महत्त्व-२

हम सब की चाहत होती है कि हमारा जीवन सफ़ल एवं समृद्ध हो। ख़ुशियों से इन्सान को अपने जीवन में संतोष प्राप्त होता है। जीवन में ख़ुशियों की प्राप्ति एक ऐसा विषय है जिसमें अधिकांश लोगों को दिलचस्पी होती है।

 

 

अंतिम अद्यतन (बुधवार, 15 अक्टूबर 2014 11:25)

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ईदे ग़दीर

धन्य है वह ईश्वर जिसने हमें असंख्य नेअमतें व अनुकंपायें प्रदान की हैं हमारा मार्गदर्शन किया है अगर हमारे पालनहार ने हमारा मार्गदर्शन न किया होता तो हमें सत्य का रास्ता न मिलता।

 

 

अंतिम अद्यतन (रविवार, 12 अक्टूबर 2014 13:47)

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