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नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार ५

इस्लामी इतिहास पवित्र नगर मक्का के उत्तरी छोर पर स्थिति हेरा नामक गुफा से आरंभ हुया। एक शांत व अंधेरी रात में पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सलल्ल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम हेरा नामक गुफा में ईश्वर की उपासना में लीन थे कि अचानक एक आवाज़ सुनी जो उनसे कह रही थीः हे मोहम्मद पढ़िये! पढ़िये ईश्वर के नाम से जिसने संसार बनाया।


अंतिम अद्यतन (बुधवार, 14 मई 2014 12:59)

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वहाबियत और उसकी असलियत

कुरआन कहता है कि अगर कोई किसी को जुर्म किये बिना क़त्ल कर दे तो ऐसा ही है से इसने सभी को क़त्ल कर दिया हो और अगर कोई ज़िन्दा करदे तो ऐसा ही है जैसे उसने सभी को ज़िन्दा कर दिया।

 

 

अंतिम अद्यतन (रविवार, 13 अप्रैल 2014 19:24)

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धार्मिक चरमपंथ पर क़ाबू पाना समय की बड़ी ज़रूरत है

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता, आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई ने ईरान और आज़रबाइजान के संयुक्त हितों के शत्रुओं से मुक़ाबले पर बल दिया है।

 

 

अंतिम अद्यतन (गुरुवार, 10 अप्रैल 2014 21:58)

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परमाणु मामले पर वरिष्ठ नेता के विचार

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने बल दिया है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान परमाणु विकास व अनुसंधान के मार्ग पर रुकने वाला नहीं है।

 

 

अंतिम अद्यतन (गुरुवार, 10 अप्रैल 2014 09:20)

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हम क्या बयाँ करेंगे फज़ीलते फ़ातिमा ज़हरा

इस में कोई शक नही है कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (सलामुल्लाह अलैहा) की ज़ात इस्लाम में सबसे ज़्यादा दीनी, इल्मी, अदबी, मुत्तक़ी व अख़लाक़ी कमालात की हामिल है। आपकी ज़ात इफ़्फ़त व फ़ज़ीलत में तमाम दुनिया की औरतों के लिए आइडियल है।


 

अंतिम अद्यतन (शनिवार, 29 मार्च 2014 11:51)

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