बारकोड

समाचार

पैग़म्बरे इस्लाम और नेक बंदों पर सलाम पढ़ना शिर्क है?

आज के युग में यह वहाबी टोला और उसके साथियों ने क़सम खा रखी है कि मुसलमानों की हर आस्था और उनके हर विश्वास पर टिप्पणी अवश्य करेंगे चाहे वह सही हो या न हो, और कितने आश्चर्य की बात है कि यह सब करने के बाद भी यह वहाबी अपने आप को मुसलमान कहते हैं,

 

अंतिम अद्यतन (मंगलवार, 17 जून 2014 21:27)

और पढ़ें ...

 

वहाबियत और इस्लामी जागरुकता

पिछले एक दशक के दौरान इस्लामी देशों में इस्लामी जागरूकता की प्रक्रिया और परिवर्तन, राजनैतिक एवं वैचारिक प्रक्रियाओं के सक्रिय होने का परिणाम हैं किंतु इनमें से कुछ प्रक्रियाएं और विचारधाराएं, शुद्ध इस्लामी शिक्षाओं से बहुत दूर हैं।


 

अंतिम अद्यतन (मंगलवार, 17 जून 2014 21:20)

और पढ़ें ...

 

वहाबियत और मासूमीन की ज़ियारत का अक़ीदा

ज़ियारत व दर्शन का इस्लाम में विशेष स्थान है और वह मुसलमानों के निकट एक अच्छा कार्य है। मुसलमान शफ़ाअत अर्थात प्रलय के दिन सिफारिश/ तवस्सुल अर्थात सहारा व माध्यम और भले लोगों की क़ब्रों के सम्मान को ऐसी चीज़ मानते हैं जिसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं है।


अंतिम अद्यतन (मंगलवार, 20 मई 2014 20:44)

और पढ़ें ...

 

नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार ५

इस्लामी इतिहास पवित्र नगर मक्का के उत्तरी छोर पर स्थिति हेरा नामक गुफा से आरंभ हुया। एक शांत व अंधेरी रात में पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सलल्ल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम हेरा नामक गुफा में ईश्वर की उपासना में लीन थे कि अचानक एक आवाज़ सुनी जो उनसे कह रही थीः हे मोहम्मद पढ़िये! पढ़िये ईश्वर के नाम से जिसने संसार बनाया।


अंतिम अद्यतन (बुधवार, 14 मई 2014 12:59)

और पढ़ें ...

 

वहाबियत और उसकी असलियत

कुरआन कहता है कि अगर कोई किसी को जुर्म किये बिना क़त्ल कर दे तो ऐसा ही है से इसने सभी को क़त्ल कर दिया हो और अगर कोई ज़िन्दा करदे तो ऐसा ही है जैसे उसने सभी को ज़िन्दा कर दिया।

 

 

अंतिम अद्यतन (रविवार, 13 अप्रैल 2014 19:24)

और पढ़ें ...

 
आलेख और अधिक ...
प्रपत्र कीजिये